अनन्त चतुर्दशी 2024
मंगलवार, सितम्बर 17, 2024 को
अनन्त चतुर्दशी पूजा मुहूर्त – 06:09 AM से 10:14 AM
चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ – सितम्बर 16, 2024 को 01:40 PM
चतुर्दशी तिथि समाप्त – सितम्बर 17, 2024 को 10:14 AM
Anant Chaturdashi | अनंत चतुर्दशी
Anant Chaturdashi | अनंत चतुर्दशी
अनंत चतुर्दशी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह गणेश चतुर्थी के दस दिवसीय उत्सव का समापन करता है और भगवान विष्णु के अनंत (अनंत) रूप की पूजा का दिन है।
अनंत चतुर्दशी भाद्रपद महीने (अगस्त-सितंबर) के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी (14वें दिन) को पड़ती है। यह हिंदू पंचांग के अनुसार होती है।
अनंत चतुर्दशी क्यों मनाई जाती है?
भगवान विष्णु की पूजा:
यह दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा के लिए समर्पित है। भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और प्रार्थना करते हैं ताकि उनके पापों का नाश हो और सुख-समृद्धि प्राप्त हो।
गणेश विसर्जन:
यह दिन गणेश चतुर्थी के दस दिवसीय उत्सव का समापन भी करता है। इस दिन भगवान गणेश की मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है, जिसे गणेश विसर्जन कहा जाता है। विसर्जन भगवान गणेश के कैलाश पर्वत की ओर प्रस्थान का प्रतीक है, जो सृष्टि के निर्माण और विनाश के चक्र का संकेत देता है।
॥ महत्त्व ॥
आध्यात्मिक शुद्धि: इस दिन उपवास और पूजा से व्यक्ति को पापों से मुक्ति और मानसिक शांति मिलती है।
नवीनीकरण का प्रतीक: गणेश मूर्तियों का विसर्जन सृजन और विनाश के चक्र का प्रतीक है, जो जीवन के निरंतर नवीकरण को दर्शाता है।
सामूहिक भक्ति: यह त्योहार लोगों को एक साथ लाता है, जिसमें वे भगवान विष्णु और गणेश दोनों की पूजा करके धार्मिक और सामुदायिक रूप से जुड़े रहते हैं।
इस प्रकार, अनंत चतुर्दशी आध्यात्मिक चिंतन और सामूहिक उत्सव का दिन है, जो धार्मिक आस्था और आनंद दोनों का संगम है।
॥ पूजन सामग्री ॥
पूजन सामग्री को व्यवस्थित रूप से ( पूजन शुरू करने के पूर्व ) पूजा स्थल पर जमा कर रख लें, जिससे पूजन में अनावश्यक व्यवधान न हो।
यदि इनमे से कुछ सामग्री ना जुटा सकें तो कोई बात नहीं, जितनी सामग्री सहर्ष जुटा सकें उसी से भक्ति भावना से पूजा करें।
- भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र
- कलश (जल से भरा हुआ), घी का दीपक, कपूर और पवित्र जल
- अनंत धागा (14 गांठों वाला, लाल या केसरिया रंग का धागा)
- धूप और दीप, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, और शक्कर का मिश्रण), गंगाजल, फूल (विशेषकर कमल का फूल)
- अक्षत (चावल), कुंकुम और हल्दी, चंदन, धनिया, लौंग, रोली (कुमकुम) और इलायची
- नारियल, तुलसी के पत्ते, पान के पत्ते, केला और अन्य फल
- मिठाई (विशेषकर मोदक या लड्डू)
॥ पूजन की विधि ॥
पूजा स्थल की तैयारी:
- सबसे पहले पूजा स्थल को साफ करके गंगाजल से पवित्र करें। भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
- एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान की मूर्ति स्थापित करें। पास में जल से भरा हुआ कलश रखें, जिसमें पान का पत्ता, सुपारी, और सिक्का डालें।
स्नान और शुद्धता:
- पूजा करने से पहले स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें। पूजा के लिए मन को शुद्ध और शांत रखें।
भगवान विष्णु का आह्वान:
- भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए उन्हें पंचामृत से स्नान कराएं। फिर गंगाजल से मूर्ति को शुद्ध करें।
- भगवान को वस्त्र, चंदन, कुमकुम, हल्दी, अक्षत, और फूल अर्पित करें। उनके समक्ष धूप और दीप प्रज्वलित करें।
अनंत सूत्र (धागा) की पूजा:
- अनंत सूत्र (14 गांठों वाला धागा) को विधि–विधान से पूजा करें। इस धागे में 14 गांठें इसलिए बांधी जाती हैं क्योंकि यह 14 लोकों का प्रतीक है।
- धागे को भगवान विष्णु के समक्ष रखकर उस पर चंदन, कुंकुम, और अक्षत अर्पित करें। फिर इसे पूजन के बाद पुरुष दाहिने हाथ में और महिलाएं बाएं हाथ में धारण करें।
कलश की पूजा:
- जल से भरे हुए कलश की पूजा करें। इसमें फूल, दूर्वा, और तुलसी के पत्ते डालें। नारियल को कलश पर रखें और इस पर रोली और चावल अर्पित करें।
अनंत भगवान की कथा सुनना:
- अनंत चतुर्दशी की कथा सुनना और सुनाना इस दिन का एक महत्वपूर्ण अंग है। कथा के द्वारा भगवान विष्णु की महिमा और अनंत सूत्र के महत्व का वर्णन किया जाता है।
प्रसाद अर्पण:
- भगवान को प्रसाद के रूप में फल, मिठाई, और नारियल अर्पित करें। भगवान विष्णु को मोदक और धनिया का प्रसाद भी विशेष रूप से पसंद होता है।
आरती:
- पूजा के अंत में भगवान विष्णु की आरती करें। आरती करते समय कपूर जलाएं और भगवान के सामने दीपक घुमाएं।
प्रसाद वितरण और अनंत सूत्र धारण करना:
- पूजा समाप्त होने के बाद अनंत सूत्र को धारण करें। जो लोग व्रत कर रहे हैं, वे प्रसाद ग्रहण करें और इसे सभी में वितरित करें।
व्रत और पारण:
- अनंत चतुर्दशी व्रत का संकल्प सुबह लिया जाता है और पूरे दिन उपवास रखा जाता है। व्रत का पारण अगले दिन सुबह किया जाता है, जब दान और प्रसाद वितरित किया जाता है।
अनंत चतुर्दशी
भगवान विष्णु की पूजा:
भक्त भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा करते हैं और 14 गांठों वाले पवित्र धागे (जिसे अनंत सूत्र कहते हैं) को हाथ में बांधते हैं। यह 14 गांठें हिंदू धर्म के अनुसार 14 लोकों का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो भगवान विष्णु की अनंत शक्ति का प्रतीक हैं।
पूजा में फूल, फल, और मिठाइयों का भोग लगाया जाता है।
व्रत रखना:
इस दिन लोग व्रत रखते हैं और अनंत व्रत कथा सुनते हैं, जिसमें यह बताया गया है कि कैसे इस व्रत को करने से व्यक्ति को सुख-समृद्धि और शांति प्राप्त होती है।
गणेश विसर्जन:
जो लोग गणेश चतुर्थी मनाते हैं, वे इस दिन गणेश जी की मूर्तियों को जल में विसर्जित करते हैं। इस दौरान बड़ी धूमधाम से झांकियां निकाली जाती हैं, जिसमें भक्त ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते-गाते हुए “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारे लगाते हैं और मूर्तियों को नदी, तालाब या समुद्र में विसर्जित करते हैं।
सांस्कृतिक परंपराएं:
कुछ जगहों पर रंग-बिरंगे जुलूस निकाले जाते हैं, जिनमें ढोल, नगाड़े और पारंपरिक संगीत का आनंद लिया जाता है। लोग मिल-जुलकर इस त्योहार को बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाते हैं।
गणेश विसर्जन यह भी दर्शाता है कि भगवान गणेश हमारे दुखों को हर कर अपने धाम लौट रहे हैं।
अनंत व्रत कथा
अनंत व्रत कथा हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण कथा है, जो अनंत चतुर्दशी के दिन सुनाई जाती है। यह कथा भगवान विष्णु के अनंत (असीम) रूप की महिमा का वर्णन करती है। कथा के अनुसार, अनंत व्रत रखने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख, समृद्धि, एवं शांति प्राप्त होती है। आइए अनंत व्रत की कथा विस्तार से जानते हैं:
अनंत व्रत कथा:
प्राचीन काल में सतयुग में एक बार एक ब्राह्मण परिवार रहता था। उस परिवार के सुमंत नामक ब्राह्मण की पत्नी का नाम दीक्षा था। इन दोनों की एक सुंदर और गुणवान बेटी थी, जिसका नाम सुषीला था। सुषीला के विवाह के बाद, उसका पति, कौंडिन्य ऋषि, अपनी पत्नी के साथ एक दिन यात्रा पर निकल पड़ा।
रास्ते में, वे नदी किनारे पहुंचे। सुषीला ने देखा कि वहां कुछ महिलाएं नदी के किनारे एक अनोखी पूजा कर रही हैं। सुषीला ने उन महिलाओं से पूछा कि वे कौन-सी पूजा कर रही हैं। महिलाओं ने बताया कि यह अनंत भगवान की पूजा है, जो सभी दुखों को हरने वाले हैं और जीवन में समृद्धि लाते हैं। उन्होंने सुषीला को बताया कि यदि वह अनंत व्रत करती है और 14 साल तक इस व्रत को निभाती है, तो उसके जीवन में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं रहेगी।
सुषीला ने वह अनंत व्रत करने का निर्णय लिया और विधि-विधान से पूजा करके भगवान अनंत की आराधना की। पूजा के बाद, उसने अपने दाहिने हाथ में 14 गांठों वाला एक धागा बांधा जिसे अनंत सूत्र कहते हैं।
कुछ समय के बाद, कौंडिन्य ऋषि और सुषीला की स्थिति अच्छी हो गई और वे बहुत धनी हो गए। परंतु कौंडिन्य ऋषि को यह नहीं पता था कि यह सारा सुख अनंत भगवान की कृपा से मिला है। उन्होंने एक दिन सुषीला के हाथ में बंधे अनंत सूत्र को देखकर उसका मजाक उड़ाया और इसे मात्र एक साधारण धागा समझकर तोड़ दिया।
इसके बाद से, कौंडिन्य ऋषि की समृद्धि धीरे-धीरे समाप्त होने लगी। उनके घर की सारी संपत्ति नष्ट हो गई, और वे फिर से दरिद्र हो गए। कौंडिन्य ऋषि को इस स्थिति का कारण समझ नहीं आ रहा था। तब उन्होंने सुषीला से इसका कारण पूछा। सुषीला ने उन्हें बताया कि यह सब अनंत भगवान के व्रत को तोड़ने और अनंत सूत्र का अपमान करने के कारण हो रहा है।
कौंडिन्य ऋषि को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने अनंत भगवान से क्षमा मांगी। उन्होंने अनंत व्रत को फिर से धारण करने का निश्चय किया और कड़ी तपस्या शुरू कर दी।
भगवान विष्णु उनके सामने प्रकट हुए और कौंडिन्य ऋषि को आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि जो भी श्रद्धा पूर्वक अनंत व्रत करेगा और 14 साल तक इस व्रत को निभाएगा, उसके सभी कष्ट दूर होंगे, और उसे सुख, समृद्धि, एवं शांति प्राप्त होगी। कौंडिन्य ऋषि ने अनंत सूत्र फिर से धारण किया और उनके जीवन में फिर से समृद्धि लौट आई।
अनंत व्रत की विधि
- इस दिन व्रत करने वाले भक्त स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं।
- भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा करते हैं।
- 14 गांठों वाला पवित्र धागा (अनंत सूत्र) बनाकर पुरुष दाएं हाथ में और महिलाएं बाएं हाथ में इसे बांधती हैं।
- पूजा के दौरान भगवान को धूप, दीप, फल, फूल, और मिठाइयां अर्पित की जाती हैं।
- व्रत करने वाले लोग पूरे दिन उपवास रखते हैं और रात को पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं।
- 14 वर्षों तक इस व्रत को करने का संकल्प लिया जाता है।
इस कथा के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि जो भी व्यक्ति श्रद्धा से अनंत व्रत करता है, उसके जीवन में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है, और उसे जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है।














